कब्र से बच्चे का शव निकाला गया।
पूर्णिया में पिता ने बेटे की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए 44 दिन बाद कब्र से शव निकलवाया। मौत के पीछे का कारण जो पिता ने बताया वह चौंकाने वाला है। पिता ने बताया कि उसकी पत्नी पर उसके पिता और भाइयों की गंदी नजर थी। इसका वह अक्सर विरोध करता था। जिससे वे नाराज थे।
जानकीनगर थाना क्षेत्र के वार्ड 3 में 5 जुलाई को 8 साल के मासूम की मौत हाे गई थी। परिजन के दबाव में शव को घर 500 मीटर दूर जेसीबी नहर के पास दफनाया गया। 44 दिन बाद उसकी दफन डेडबॉडी को मजिस्ट्रेट और पुलिस की निगरानी में नहर के पास कब्र से निकला गया। अब जानिए बेटे की मौत के पीछे की वजह तलाश रहे पिता की कहानी...
शादी के बाद से पत्नी पर पिता की थी बुरी नजर
शख्स ने बताया कि उनकी शादी 3 जून 2009 को हुई थी। शादी के बाद से पत्नी पर उनके पिता और भाइयों की गंदी नजर थी। इसका उसे कोई अंदाजा नहीं था। शादी के 15 दिन बाद वह काम की तलाश में बेंगलुरु चला गया। वहां एक कैंटीन में काम करने लगा। उसकी गैर मौजूदगी में उसके पिता गवना की बात कराने का हवाला देते हुए पत्नी को घर ले आए।
इसके बाद उसके पिता ने पत्नी के साथ गलत किया। पत्नी ने फोन कर सारी बात बताई, जिसके बाद वह 6 महीने बाद दिसंबर में वापस गांव लौट आया। हालांकि, उसने पत्नी की बातों पर यकीन नहीं किया। मगर एक दिन उसने खुद पिता को पत्नी के साथ गंदी हरकत करते देख लिया। इसके बाद उसने इसका विरोध किया। पत्नी के साथ महिला थाना गए। फिर पंचायत में भी बात गई।
विरोध करने पर घर वालों ने खाना-पानी कर दिया था बंद
पंचायत के बाद मामला सुलझा। पीड़िता के अनुसार, वह काम की वजह से अक्सर बाहर जाता रहता था। कुछ साल बाद पत्नी पर दोबारा से पिता ने गंदी निगाह डालनी शुरू कर दी। बड़े और छोटे भाई जबरन उसकी पत्नी के साथ गलत करना चाहा। पत्नी ने फोन कर सारी बात बताई और मर जाने की धमकी दी। इसके बाद वो काम छोड़कर फौरन वापस चला आया।
पति ने विरोध किया तो घर वालों ने दोनों का खाना-पानी बंद कर दिया। इस बात की जानकारी स्थानीय जानकी नगर थाना में दी गई। हालांकि, बाद में पारिवारिक रिश्तों की वजह से इस केस को दोनों ने वापस ले लिया। इन सब से गुस्साए पिता और भाइयों ने उसे पीटा और हाथ तक तोड़ दिया था।
बच्चा बड़ा होकर फौजी बनना चाहता था
बेटे का जिक्र करते हुए पिता कहते हैं कि 8 साल का अभिषेक क्लास वन में पढ़ता था। बड़ा होकर फौजी बनना चाहता था। घटनाक्रम से एक रोज पहले स्कूल से उसे किताबें दी गई थी। इससे वह बेहद खुश था। 5 जुलाई की सुबह स्कूल के लिए निकला, लेकिन बीच रास्ते से ही वापस लौट आया।
बच्चे ने मां को पेट में दर्द होने की बात बताई। जिसके बाद उसकी पत्नी ने फोन कर बेटे की तबीयत खराब होने की बात बताई। जब तक वे पहुंचे, बेटे की तबीयत काफी बिगड़ चुकी थी। एम्बुलेंस के लिए कॉल करने पर घर वालों ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया। इसके बाद वे गांव के एक युवक की मदद से बाइक से अस्पताल के लिए निकले।
रास्ते में बच्चे ने उन्हें घर वालों की ओर से कुछ खिलाने की बात बताई और कहा पापा मुझे बचा लो। हालांकि, इलाज के दौरान बच्चे ने दम तोड़ दिया। इसके बाद उन्हें अपने पिता और बड़े भाई पर शक हुआ। वे पोस्टमार्टम के लिए अड़ गए। मगर घर वालों ने न ही पोस्टमॉर्टम होने दिया और न ही उसकी ये बात सुनी।
बेटे के शव को घर से 500 मीटर दूर जेसीबी नहर के पास दफनाया गया। इसके बाद से वे पुलिस से शव निकलवाने की गुहार लगा रहे थे। करीब 15 दिन थाना से लेकर कार्यालय दौड़ते रहे। करीब 44 दिन बाद 17 अगस्त को मजिस्ट्रेट और पुलिस की निगरानी में नहर के पास दफन बेटे की कब्र खुदवाई। अब मामले की जांच चल रही है।