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Tuesday, August 8, 2023

BIHAR/ यहां जिंदा लोगों की चिंता नहीं मुर्दों की होती है जांच; जानिए क्या है मामला -

Bhagalpur यहां जिंदा लोगों की चिंता नहीं मुर्दों की होती है जांच; जानिए क्या है मामला -
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भागलपुर में जिंदा लोगों की चिंता नहीं, मुर्दों की होती है जांच। सांकेतिक तस्वीर
आलोक कुमार मिश्रा, भागलपुर: कोरोना महामारी का दंश पुरी दुनिया ने झेला है। महामारी के चलते लाखों बेनुगाह हमेशा के लिए मौत की नींद सो गए। एक वक्त था, जब गली-मोहल्ले में कोरोना की दहशत दिखाई पड़ती थी। सरकार से लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद था।

आम लोग भयभीत थे, लेकिन जैसे-जैसे कोरोना की भयावहता कम हुई तो लापरवाही शुरू हो गई। प्रशासन चैन की नींद लेना शुरू कर दिया।

बात करें भागलपुर की तो शहर और आसपास के क्षेत्रों में कहीं भी लोगों के कोरोना की जांच के लिए कैंप या फिर स्टॉल नहीं लगाए जा रहे हैं। यहां तक की देश के विभिन्न जगहों से यहां उतरने वाले यात्रियों की कोरोना जांच की रेलवे स्टेशन पर कोई व्यवस्था नहीं है।

शवों का कराया जा रहा कोरोना टेस्ट

रेलवे स्टेशन से कोरोना जांच शिविर हटा लिया गया है, जबकि यहां प्रतिदिन बाहर से 20-25 हजार यात्री आते हैं। वहीं, दूसरी तरफ मौत के बाद कोरोना जांच के लिए शवों का कोरोना जांच कराई जाती है। घटनास्थल से शवों को मायागंज अस्पताल ले जाया जाता है। ऐसे में कोरोना जांच से पोस्टमार्टम की कार्रवाई तक शोक-संतप्त परिवार वालों को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

ऐक ऐसा ही मामला कुछ दिनों पहले सामने आया। रविवार की सुबह बबरगंज थाना क्षेत्र के अलीगंज गंगटी स्थित अलखधाम मंदिर परिसर में भैरोपुर निवासी रूपेश उर्फ मुखिया मंडल की बदमाशों ने हत्या कर दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए सीधे नौलखा कोठी (मेडिकल कॉलेज पोस्टमार्टम हाउस) भेजने से पहले कोरोना जांच कराने के लिए मायागंज अस्पताल भेज दिया गया।

घंटों करना पड़ता है इंतजार

शोक संतप्त परिवार वालों का कहना था कि अस्पताल ले जाने पर पहले तो कोरोना जांच में 35-40 मिनट का समय लगा। उसके बाद कागजी प्रक्रिया में तीन से चार घंटे लगाया गया। दोपहर साढ़े तीन बजे तक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

सारी प्रक्रिया पूरी होने में शाम साढ़े चार बज गया। सारी प्रक्रिया के दौरान पीड़ित परिवार के लोगों को सात घंटे प्रतीक्षा करनी पड़ी।

गत 30 मई की रात हबीबपुर थानाक्षेत्र में राकेश सिंह की गोली मारकर बदमाशों ने हत्या कर दी थी। कोरोना जांच, कागजी और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने में घंटों समय लग गए थे। दूसरे दिन दोपहर एक बजे पोस्टमार्टम कराने के बाद स्वजन को शव सौंपा गया था।

ऐसे में शोक संतप्त परिवार के लोगों को 14-15 घंटे प्रतीक्षा करनी पड़ी। पुलिस के अनुसार, थाना से कोरोना जांच कराने संबंधी कागजात बनाकर अस्पताल भेजा जाता है। अस्पताल के कर्मियों का कहना है कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद 15-20 मिनट में कोरोना जांच की जाती है।

पुलिस ने क्या कहा

हबीबपुर इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष ने बताया कि 'सावधानी के मद्देनजर पोस्टमार्टम कराने से पहले शव का कोरोना जांच कराई जाती है। जांच संबंधी थाना से लिखकर अस्पताल भेजा जाता है। शव का ही नहीं बल्कि, किसी केस के आरोपित को जेल भेजने से पहले अभी भी कोरोना जांच कराई जा रही है।'