उन्होंने कहा कि राज्य में सभी औद्योगिक इकाइयों को हर हाल में प्रदूषण नियमों का पालन करना होगा और उन्हें अपने फैक्ट्री में प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले उपकरण स्थापित करने होंगे. राज्य में नई खुलने वाली औद्योगिक इकाइयों को पर्यावरण और प्रदूषण संबंधी सर्टिफिकेट जारी करने में सरकार तत्परता बरतेगी और उन्हें आवेदन के 1 सप्ताह के अंदर पर्यावरण का क्लीयरेंस जारी कर दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण में कमी लाने को लेकर राज्य सरकार गंभीर है और इसके लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे. पर्यावरण और वन मंत्री ने कहा कि राज्य में घोड़पराश के आतंक से किसानों को बचाने के लिए सरकार ठोंस कदम उठाएगी और इसके लिए स्थायी समाधान ढूंढ कर निकाला जाएगा. उन्होंने विभागीय अधिकारियों को इस दिशा में अपेक्षित कदम उठाने के लिए एक कार्य योजना बनाने का भी निर्देश दिया है.
उन्होंने कहा कि जिन्हें राज्य में नीलगाय की संज्ञा दी जा रही है, वास्तव में वह नीलगाय नहीं है बल्कि वे घोड़पराश और नीलबकरी हैं. इनकी संख्या कम करने के दृष्टिकोण से घोड़पराशों की नसबंदी भी कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि बिहार के विभिन्न जिलों में जो घोड़पराश हैं, वह कहीं से भी नीलगाय की प्रजाति नहीं है.
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि जंगली हाथियों के आतंक से नागरिकों को मुक्ति दिलाने के लिए उनके विभाग की ओर से प्रभावी कदम उठाए जाएंगे. हाल ही में नवादा जिले में एक पागल हाथी द्वारा 3 लोगों को कुचल कर मारे जाने की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विभाग गंभीरता पूर्वक काम कर रहा है.
