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Saturday, January 30, 2021

CBSE NEWS:अब पप्पू पास होगा! CBSE का नया नियम आया, दसवीं में नहीं होगा कोई फेल

कोशी लाइव डेस्क:

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के नए नियमों के तहत अब दसवीं में कोई फेल नहीं होगा. ‘पप्पू-चप्पू’ सभी पास होंगे. सीबीएसई में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की तो समझिए निकल पड़ी है. अगर छात्र-छात्राएं किसी स्किल में अच्छे हैं तो सिर्फ इस आधार पर फेल नहीं होंगे कि उनके मैथ्स में कम नंबर आए हैं या फिर साइंस में कम नंबर आए हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि छात्र-छात्राओं का साल बर्बाद होने से बच जाएगा.

स्किल इंडिया के मकसद को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई बोर्ड ने यह नियम बनाया है. कई ऐसे विद्यार्थी होते हैं जो आम तौर पर मैथ्स या साइंस जैसे विषयों में फेल हो जाते हैं लेकिन वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंप्युटर या और किसी स्किल में अच्छे हैं.

ऐसे में सिर्फ एक या दो विषय में अच्छे नहीं होने पर उन्हें फेल नहीं किया जाएगा.

साल बर्बाद होने से बचेगा

सीबीएसई के इस नए नियम से उन छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा जो हुनरमंद होते हुए भी पढ़ाई में कमजोर होने की वजह से फेल हो जाया करते थे. अब तक उनके हुनर का कोई फायदा नहीं मिल रहा था. लेकिन अब वे पढ़ाई के अलावा अन्य स्किल की वजह से भी पास हो सकेंगे और उनका साल बर्बाद होने से बच जाएगा. इस बारे में जब TV9 भारतवर्ष की तरफ से हमने बीजेपी मुंबई टीचर सेल अध्यक्ष राजू बंडगर से बात की तो उनका कहना था, “सीबीएसई का नया नियम इस मायने में अच्छा है कि अगर किसी को साहित्य में रुचि है और आगे वो अपना करियर इसी में बनाना चाहता है तो ऐसे स्टूडेंट्स का साल इसलिए क्यों खराब हो कि वो मैथ्स में पास नहीं कर सका या साइंस में उसके थोड़े से नंबर कम रह गए.”

लेकिन कुछ ऐसी भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं जो इस नए नियम पर सवाल उठाती हैं. ऐसी ही एक प्रतिक्रिया एजुकेशन एक्सपर्ट हेरांब कुलकर्णी की आई है. TV9 भारतवर्ष डिजिटल से बातचीत में वे कहते हैं, “यह अच्छी बात है कि किसी को फेल नहीं किया जाएगा. क्योंकि फेल होने के डर से ड्रॉप आउट रेट यानी स्कूल नहीं आने वालों विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती है. लेकिन यह ठीक नहीं है कि उन्हें विषय की जानकारी नहीं होने पर भी पास कर दिया जाए. इसकी बजाय ऐसे बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देकर उनकी कमियों को पूरा किया जाना चाहिए. तब पास करना चाहिए.”

किताबी कीड़ा बनाने की बजाए स्किल लर्निंग पर जोर

सीबीएसई की ओर से तय स्किल बेस्ड लर्निंग प्रोग्राम में स्टूडेंट्स की रुचि साल-दर-साल बढ़ती जा रही है. 2020 में जहां 20 प्रतिशत छात्र-छात्राओं ने स्किल बेस्ड सब्जेक्ट्स को चुना तो 2021 में इनका प्रतिशत 30 हो गया. यानी छात्र-छात्राओं का रुझान स्किल डेवलपमेंट में बढ़ा है और अगर कोई किताबी पढ़ाई में अच्छा नहीं माना जा रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि वो नाकारा या पप्पू है. अब पप्पू भी पास करेगा और उसे पप्पू मजाक से नहीं बल्कि इज्जत से बुलाया जाएगा.