पटना। मेवालाल चौधरी बिहार सरकार के तीसरे ऐसे मंत्री हैं जिन्हें पदभार ग्रहण करने के बाद पुराने आरोप में इस्तीफा देना पड़ा है। मेवालाल चौधरी के पूर्व जीतन राम मांझी और आरएन सिंह को भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा था। इन दोनों ने भी त्यागपत्र दिया था। वैसे बाद में जीतन राम मांझी और आरएन सिंह आरोप मुक्त हुए और मंत्री भी बने।
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद 2005 में मांझी को देना पड़ा था इस्तीफा
जीतन राम मांझी 2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बने मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे, पर मंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही घंटे बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।
परिवहन मंत्री के रूप में आरएन सिंह ने दिया था इस्तीफा
वर्ष 2008 में परिवहन मंत्री आरएन सिंह ने भी निगरानी ब्यूरो से जुड़े एक मामले में नाम आने की बात पर इस्तीफा दे दिया था। मामला 1990 का है, तब निगरानी ब्यूरो ने उनके विरुद्ध चार्जशीट दायर की थी। एक समय सिंह मुजफ्फरपुर थर्मल पावर स्टेशन में फ्यूएल टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में काम कर रहे थे। उन पर यह आरोप था कि उन्होंने खराब क्वालिटी के पाइप की खरीदारी थर्मल पावर स्टेशन के लिए की थी। वैसे बाद में न्यायालय से वह बरी हो गए थे। बरी होने के बाद पुन: उन्हें मंत्री बनाया गया था।
पदभार ग्रहण करने के कुछ देर बाद इस्तीफा
गुरुवार को बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी ने पदभार ग्रहण करने के कुछ ही देर बाद इस्तीफा दे दिया। शिक्षा मंत्री की शपथ लेने से एक दिन पहले मेवालाल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की थी। नीतीश से मिलने के बाद उन्होंने सबकुछ ठीक होने की बात कही थी। गुरुवार को मेवालाल दोबारा सीएम नीतीश से मिले और इस्तीफा दे दिया। अब शिक्षा विभाग का कार्यभार अशोक चौधरी को दिया गया है।
