World Suicide Prevention Day 2020: सिनेमा की दुनिया ऊपर से बहुत कलरफुल है। खुशियां है, नाच है और एक किस्म का जश्न है। साल दर साल ना जानें कितने युवा, इस चमक-धमक में अपनी सपनों की रोशनी लेकर आते हैं। लेकिन यह जितना बाहर से खुशियों से भरा है, अंदर उनता ही तनाव है। एक बिना रूकने वाली दौड़ है। ज़िंदगी के तामाम पहलू हैं। लेकिन इन सबके बीच कभी-कभी ज़िंदगी फंस जाती है। पर्दे पीछे के अकेले पन में, तो कहीं उतार-चढ़ाव के तनाव में। कई बार यह परिस्थिति आत्महत्या तक लेकर जाती है। साल 2020 भी इससे अछूता नहीं रहा। बड़ी कम उम्र में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने कुछ ऐसा कदम उठा लिया, जो सिनेमा फैंस को झकझोर कर रख दिया। यह पहली बार नहीं है, साल-दर-साल ऐसी ही कई ज़िंदगियां समय से पहले ही दुनिया का साथ छोड़ गईं। लेकिन यह कुछ ऐसा है, जिसे रोका जाता सकता है। आइए जानते हैं उन सेलेब्स के बारे में, जो इस दुनिया में होते, तो काफी कुछ और कर गुजरते...
1. सुशांत सिंह राजपूत (2020)- सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को अपने बांद्रा स्थित घर पर मृत पाए गए। इस बात की जांच जारी है कि उनकी हत्या हुई या आत्महत्या। इस केस में ड्रग्स एंगल भी सामने आया है। ड्रग्स को लेकर एनसीबी ने रिया चक्रवर्ती समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है।
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2. प्रत्यूषा बनर्जी (2016)- बालिका बधू में आनंदी का किरदार निभाने वाले प्रत्यूषा बनर्जी मुंबई में अपने फ्लैट पर मृत पाई गईं। उनकी लाश पंखे से लटकी मिली। प्रत्यूषा ने बिग बॉस शो में भी भाग लिया था। प्रत्यूषा के परिवार वालों ने उनके ब्वॉयफ्रेंड्स राहुल राज सिंह पर सुसाइड के लिए उकसाने का आरोप लगाया।
3. जिया ख़ान (2013)- जिया ख़ान की आत्महत्या को लेकर भी खूब सुर्खियां बनी थीं। निशब्द, हाउसफुल और गजनी जैसी फ़िल्म में नज़र आई जिया ख़ान 25 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। जिया की मां ने सूरज पंचोली के ऊपर आरोप लगाए। कुछ दिनों पहले जिया की मां ने केस में दवाब बनाने के लिए सलमान ख़ान का भी नाम लिया था।
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4. दिव्या भारती (1993)- दिव्या भारती एक दौर में बॉलीवुड की उभरती हुईं एक्ट्रेस थीं। साल 1993 में अचानक उनकी मृत्यु हो गई। वह अपने घर के फ्लैट की खिड़की से गिरने के बाद मृत पाई गई थीं। यह काफी उलझी हुई गुत्थी है। कुछ लोग इसे एक्सिटेंड मानते हैं। कुछ लोग आत्महत्या।
5. गुरुदत्त (1964)- हिंदी फ़िल्म के गोल्डन एज में गुरुदत्त एक नायब एक्टर और फ़िल्ममेकर थे। उन्होंने कागज के फूल और साहब बीबी और गुलाम समेत ना जाने कितनी बेहतरीन फ़िल्में बनाई। साल 1964 में गुरुदत्त अपने किराये के अपॉर्टमेंट मृत पाए गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके साथ शराब और नींद की गोलियां भी मिली थीं। कुछ लोग इसे आत्महत्या बताते हैं, तो कुछ लोग ओवरडोज़ भी बताते हैं।