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Thursday, September 10, 2020

सहरसा/साहब न बाबू, भगवान भरोसे चल रहा परिवहन कार्यालय

सहरसा। परिवहन विभाग के कामकाज को सुचारू ढंग से चलाने के लिए परिवहन विभाग ने समाहरणालय परिसर में एक सुसज्जित कार्यालय उपलब्ध कराया, परंतु न तो वहां डीटीओ का अभी तकपदस्थापन हुआ है और न ही कर्मचारियों की कमी को दूर किया जा सका है। इसका परिणाम है कि परिवहन कार्यालय का कामकाज भगवान भरोसे चल रहा है। ऐसी स्थिति में दो दिन के कार्य के लिए लोगों को दस बार लौटाया जाता है। ऐसे में गांव-देहात से आनेवाले लोग थक-हारकर दलालों के चक्कर में पड़ जाते हैं। नाजायज खर्च के बिना लोगों का कोई काम नहीं हो पाता। इस बाबत गुरुवार को दैनिक जागरण की टीम ने जब परिवहन विभाग के कार्यालय का निरीक्षण किया तो पूरी व्यवस्था उजागर हो गई।

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समय 10.30 बजे

कार्यालय के निचले तल में बरामदे पर दो व्यक्ति बातचीत कर रहे थे। परिसर में चार-पांच बाइक खड़ी थी। सीढ़ी के बगल में खड़े दोनों व्यक्ति से परिचय पूछा गया तो एक ने अपना नाम रंजन कुमार और दूसरे ने बिना नाम बताए यह कहते हुए कि वे इस कार्यालय के लोग नहीं हैं और परिसर से बाहर निकल गए। इस तल के एक कमरे में भी ताला लटका हुआ था। फोटो खीचते देख हड़बड़ी में एक गृहरक्षक भी लाठी लिए नीचे आ गए।

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समय 10. 55 बजे

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प्रथम तल जाने के क्रम में दो व्यक्ति सीढ़ी पर खड़े थे। एक ने अपना नाम रघुवीर और दूसरे ने सेठ कुमार बताया। कहा कि वे लोग चालक हैं और लाईसेंस बनाने के सिलसिले में यहां आए हैं। ऊपर पहुंचते ही एक व्यक्ति ने दरवाजे को धकेलकर खोला। उसने अपना नाम मो. सलाम बताया। कहा कि वे इस कार्यालय के चतुर्थ वर्गीय कर्मी हैं। जब बड़ा बाबू के बारे में पूछा गया तो उसने अंदर की ओर इशारा किया। एक कुर्सी पर बड़ा बाबू मृत्युंजय कुमार और दूसरी पर ब्रह्मादेव मेहता लिपिक बैठे कुछ कागजात का अवलोकन कर रहे थे। पूछे जाने पर बड़ा बाबू ने बताया कि साहब भी प्रभार में हैं और कार्यालय में महज हम दो कर्मियों के भरोसे कामकाज चल रहा है। कर्मियों का यहां बेहद अभाव है।

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समय 11. 10 बजे

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टीम पुन: नीचे आई तो एक चतुर्थ वर्गीय कर्मी, गृहरक्षक और एक अन्य व्यक्ति लगातार कार्यालय के अन्य लोगों को फोन करते देखे गए। सामने के बंद एमवीआई कार्यालय के बारे में पूछा गया तो बताया गया कि एमवीआई कार्यालय का कार्य शुक्रवार और शनिवार को ही होता है। उसी दिन यह कार्यालय खुलता है। इस बीच गृहरक्षकों का नीचे उतरना शुरू हुआ। इनलोगों ने अपना नाम धनेश्वर प्रसाद, सियाराम प्रसाद, वेदानंद चौधरी बताया। बाद में हवलदार सुधांशु यादव भी पहुंचे। एमवीआई कार्यालय के बगल वाले कक्ष में भी ताला लटका हुआ था।

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11.30 बजे

कंप्यूटर कक्ष में दो ऑपरेटर संतोष कुमार, मनीष कुमार और गोपाल कुमार कार्यरत थे। वहीं अंदर कक्ष में प्रोग्रामर रूबी कुमारी कुछ कागजातों का फोटोस्टेट कर रही थी। पूछने पर बताया गया कि एक ऑपरेटर अवकाश पर हैं। जब उनलोगों से पूछा गया कि क्या कार्यालय में झाड़ू नहीं लगता है तो बताया गया कि सफाईकर्मी महिला है जो जीउतियां पर्व के कारण आज नहीं आई है। इस कक्ष में गोविंदपुर के सुभाष कुमार, गंगजला के कुंदन कुमार सिंह, रहुआमणि के अमित कुमार अपने-अपने कार्य के लिए खड़े थे। बिजलपुर के उमेश कुमार ने बताया कि चालक लाईसेंस बनाने के लिए उसने दलाल को छह हजार रुपये दिये। जब पूछा गया कि इस काम में महज आठ सौ और 25 सौ रुपये का चालान कटता है तो उसने कहा कि पचास बार कार्यालय का चक्कर लगाने से अच्छा है कि दलालों को छह हजार रुपये देकर कार्य करवा लिया जाए।