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Thursday, September 10, 2020

सहरसा/कुपोषण से बचाव के लिए स्तनपान जरूरी हैबच्चों के मानसिक विकास के लिए लाभदायक है स्तनपान

कुपोषण से बचाव के लिए स्तनपान जरूरी है
बच्चों के मानसिक विकास के लिए लाभदायक है स्तनपान 
छ्ह माह तक केवल स्तनपान करता है निमोनिया-डायरिया से  बचाव
6 महीने के बाद स्तनपान के साथ-साथ बच्चों को पूरक आहार देना चाहिए 

सहरसा -10 सितंबर। हमारे देश में बच्चों में कुपोषण बहुत आम और बड़ी समस्या है। जरा सी सावधानी और सतर्कता से बच्चों को कुपोषित होने से बचाया जा सकता है। पैदा होने के बाद 6 महीनों तक बच्चों को केवल माता का ही दूध पिलाएं। यही सही पोषण की शुरुआत है। बच्चों में आवश्यक संतुलित आहार की लंबे समय तक कमी बने रहना ही कुपोषण है। कुपोषण की समस्या सबसे ज्यादा 5 साल से कम उम्र के बच्चों में होती है। इस आयुवर्ग के बच्चों की मौत के लिए कुपोषण एक बड़ा कारण है। शिशुओं में कुपोषण की मात्रा को कम करने के लिए सरकार द्वारा पूरे सितम्बर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है. पूरे माह के दौरान लोगों को विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से शिशुओं में कुपोषण से होने वाली खतरों की जानकारी देने के साथ साथ सही पोषण सम्बंधित जानकारियाँ दी जा रही हैं।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डाक्टर कुमार विवेकानंद ने बताया कि कुपोषण वह अवस्था है जिसमें पौष्टिक पदार्थ और भोजन अपर्याप्त रूप से लेने के कारण शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है और शरीर कुपोषण का शिकार हो जाता हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि बढ़ती हुई उम्र के अनुसार बच्चों को स्तनपान के साथ-साथ पर्याप्त भोजन की भी आवश्यकता होती है। इसके न मिलने पर वह कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। कुपोषित बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। ऐसे बच्चों में डायरिया व निमोनिया जैसी बीमारियां होने की ज्यादा संभावना होती है। उनका कहना है कि कुपोषण से बचाव के लिए बच्चों को कंगारू मदर के साथ-साथ सही स्वास्थ्य सेवाएं और पौष्टिक आहार दिया जाना चाहिए, जिससे बच्चों को कुपोषित होने से बचाया जा सकता है।

बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए निम्न बातों का रखें विशेष ध्यान:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारीडाक्टर कुमार विवेकानंद ने बताया कि

1-एक घंटे के अंदर कराये स्तनपान - सबसे जरूरी है मां का पहला पीला गाढ़ा दूध, जिसे कोलेस्ट्रम कहते हैं, यह बच्चे का पहला टीका होता है जिसे बच्चे को जन्म के एक घंटे भीतर पिलाया जाना चाहिए। इससे बच्चे में बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
2- 6 माह तक केवल स्तनपान कराना- छ: महीने की उम्र तक बच्चे को केवल स्तनपान कराये, यहां तक कि पानी भी नहीं पिलाना चाहिए।
3- पूरक आहार- छह महीने के बाद स्तनपान के साथ-साथ बच्चों को पूरक आहार जरूर खिलाना चाहिए और यह पूरक आहार ज्यादा पतला नहीं होना चाहिए। इसके अलावा बच्चे को कुपोषण से बचाने हेतु उम्र के अनुसार बच्चे को खाना खिलाना चाहिए। बाहर की चीजें न खिलायें। घर का ही बना खाना जैसे- दलिया, खिचड़ी, सूजी का हलवा, केला, हरी सब्जियां आदि चीजों को मसल कर खिलायें जिससे बच्चे को पौष्टिक आहार मिल सके और वह कुपोषित होने से भी बच सकें।

4- बीमार पड़ने से बचाएं- बच्चों को कुपोषण से बचाव के लिए संपूर्ण टीकाकरण कराने तथा विटामिन ए की खुराक पिलाने तथा पेट के कीड़े की दवा खिलाने से बच्चों में होने वाली गंभीर बीमारियां जैसे- टीबी, काली खांसी, खसरा और रतौंधी, एनीमिया जैसी बीमारियों से भी बचाया जा सकता हैं, क्योंकि बार-बार बीमार पड़ना कुपोषण का प्रमुख कारण है।
5- बीमारी के दौरान खिलाना- बीमारी के दौरान भी बच्चों को खाना अवश्य खिलायें। जितना बच्चा खा सके उतना खिलायें, साथ ही स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।
6- आंगनबाड़ी सेवाओं का उपयोग- आंगनबाड़ी केंद्र 5 वर्ष तक की उम्र के बच्चों को पूरक आहार मुहैया कराता है। इसमें बहुत सारे पोषक तत्व होते हैं। इसको भी खिलाने से बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सकता है।
7- स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच- बीमारी के दौरान बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र जरूर ले जाना चाहिए, जिससे बच्चे को शीघ्र उपचार द्वारा बीमारियों की रोकथाम किया जा सके और उन बीमारियों से कुपोषित होने से बच्चों को बचाया भी जा सकता है। डाक्टर कुमार विवेकानंद ने बताया कि अगर कोई बच्चा गंभीर कुपोषित व बीमार है तो उसके बचाव के लिए बच्चे को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराना चाहिए। यहां पर बच्चों को भर्ती कर उचित देखभाल की जाती है, जिससे बच्चा ठीक हो जाता है।