पिछले दो महीने में दो ऐसे मामले रहे, जिन्होंने देश में भूचाल ला दिया. एक बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी तो दूसरा कानपुर का बिकरू कांड जिसका अंजाम विकास दुबे का एनकाउंटर रहा. यूं तो दोनों ही केस बिल्कुल अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों में ध्यान देने वाली जो बात है वो है अलग-अलग प्रदेशों की पुलिस का इन्हें लेकर रवैया.
विकास दुबे कांड में जहां एमपी पुलिस ने यूपी पुलिस की राह आसान की तो सुशांत केस में मुंबई और पटना की पुलिस के बीच ऐतिहासिक अदावत देखी गई. क्या इसकी वजह यही नहीं है कि एमपी और यूपी में बीजेपी की ही सरकार है जबकि महाराष्ट्र और बिहार में परस्पर विरोधी दलों की? जानकार इसका जवाब हां में देते हैं.
विकास दुबे केस में एमपी-यूपी पुलिस की जुगलबंदी
2-3 जुलाई की रात कानपुर में जो कुछ हुआ वो पूरे देश की पुलिस को हिला देने वाला था. बिकरू गांव में विकास दुबे को पकड़ने गई कानपुर पुलिस पर फायरिंग हुई तो 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए. घटना के बाद फरार विकास दुबे की तलाश में यूपी पुलिस हर जगह हाथ-पैर मारती रही लेकिन वो हत्थे चढ़ा एमपी पुलिस के.
एमपी पुलिस ने विकास को उज्जैन के महाकाल मंदिर से पकड़ा तो सही लेकिन घंटों बाद भी न तो गिरफ्तार किया न कोर्ट में पेशी की कोशिश की. शाम को उज्जैन पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीफ) को सौंप दिया जिसने कानपुर पहुंचने से पहले ही उसे एनकाउंटर में मार गिराया.
विकास दुबे का अंत करने में यूपी पुलिस को एमपी पुलिस की भरपूर सहायता मिली. इसकी वजह यही रही कि दोनों ही राज्यों में एक ही पार्टी यानी बीजेपी की सरकार है. विकास दुबे के पकड़ में आने के बाद ही एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया था. उन्होंने कहा कि मैंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात कर ली है. शीघ्र आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. मध्य प्रदेश पुलिस, विकास दुबे को उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंपेगी.
दोनों ही राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार होने से पुलिस में तालमेल गजब का रहा. कोर्ट में यूपी पुलिस को रिपोर्ट न देनी पड़े इसके लिए एमपी पुलिस ने विकास दुबे की गिरफ्तारी तक नहीं दिखाई. जानकारों के मुताबिक, अगर कोई अपराधी न्यायिक हिरासत में हो और इस दौरान उसके साथ कोई अनहोनी हो जाए या वो एनकाउंटर में मारा जाए तो ऐसे हालात में संबंधित जिले की पुलिस को कोर्ट को पूरे मामले की रिपोर्ट देनी पड़ती है. लेकिन एमपी पुलिस के सहयोग से यूपी पुलिस को कोर्ट में रिपोर्ट नहीं देनी पड़ी.
सुशांत केस में मुंबई-पटना पुलिस में तकरार
वहीं एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले की जांच दो राज्यों की पुलिस कर रही है. महाराष्ट्र की मुंबई पुलिस ने जहां एडीआर दर्ज की है तो बिहार में पटना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर रखी है. अब हाल ये है कि मुंबई में स्थानीय पुलिस और पटना पुलिस में घमासान मचा हुआ है.
पहले मुंबई पुलिस ने पटना पुलिस की एफआईआर पर ही सवाल उठाए. फिर वहां से आई टीम के सदस्यों को भाव नहीं दिया और बाद में जांच का जायजा लेने आए पटना के एसपी को 14 दिन के लिए क्वारनटीन कर दिया गया है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की है, लेकिन सवाल अब भी वही है कि अगर सुशांत ने खुदकुशी मुंबई में की है तो पटना में उसकी जांच कैसे हो सकती है और बिहार के मुख्यमंत्री उसकी सीबीआई जांच के आदेश कैसे दे सकते हैं?
इस तरह के हालात इसलिए हैं क्योंकि दोनों ही राज्यों में दो अलग-अलग पार्टियों या गठबंधन की सरकार है. यहां तालमेल की बात तो छोड़िए दोनों राज्यों की पुलिस में एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ दिख रही है. सब अपनी-अपनी रूल बुक लेकर बैठे हुए हैं.
रूल बुक विकास दुबे के कांड के समय भी एमपी और यूपी पुलिस खोलकर बैठी थीं. लेकिन इन दो प्रकरणों से साफ हो गया है कि जैसा सरकार का रुख वैसी पुलिस की रूल बुक.