माना जा रहा है कि इस समय हमारे सूर्य की सतह (Surface of the Sun) शांत है. करीब हर 11 साल बाद सूर्य की सतह पर सक्रियता में बदलाव आते हैं. फिलहाल सूर्य की स्थिति सोलर मिनिमम (Solar minimum) कहा जाता है, लेकिन हाल ही में सूर्य की सतह पर एक सनस्पॉट (Sun spot) दिखाई दिया है. यह विशाल सनस्पॉट (Sun spot) हमारी पृथ्वी की ओर घूमता दिख रहा है. इसकी वजह से तीव्र सौर ज्वालाएं (Solar Flares) पैदा हो सकती हैं. वैज्ञानिकों ने इस हफ्ते AR2770 सनस्पॉट का पता लगाया है और आने वाले दिनों में इसके और बड़े होने की संभावना है.
निकलने लगी हैं छोटी ज्वालाएं
अंतरिक्ष के मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली वेबसाइट स्पेसवैदर डॉटकॉम की रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत सारी छोटी ज्वालाएं इस सनस्पॉट से पहले ही निकल चुकी हैं और इस सनस्पॉट का मुंह पृथ्वी की ओर मुड़ रहा है.
निकलने लगी हैं छोटी ज्वालाएं
अंतरिक्ष के मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली वेबसाइट स्पेसवैदर डॉटकॉम की रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत सारी छोटी ज्वालाएं इस सनस्पॉट से पहले ही निकल चुकी हैं और इस सनस्पॉट का मुंह पृथ्वी की ओर मुड़ रहा है.
इन ज्वालाओं कने पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में आयनीकरण की लहर तो पैदा की है, लेकिन अभी तक कुछ बड़ा नहीं घटा है.
क्या अहमियत है इन धब्बों कीसनस्पॉट सूर्य पर वे काले धब्बे होते हैं जो बाकी तारे के मुकाबले ठंडे होते हैं. ये सूर्य की मैग्नेटिक फील्ड की सतह से अंतरक्रिया के कारण पैदा होते हैं. इन तीव्र मैग्नेटिक गतिविधियों का नतीजा यह होता है कि इनसे बहुत ही विशाल मात्रा में ऊर्जा निकलती है जिसे सौरज्वाला (Solar flare) या सौर तूफान (Solar storms) या कोरोनल मास इजेक्शन्स (CME) भी कहते हैं.
कितने बड़े होते हैं ये
अभी तक इस पूरी प्रक्रिया को अच्छे से समझा नहीं जा सका है, लेकिन ये धब्बे सूर्य की फोटोस्फियर इलाके में बनते हैं और ये 50 हजार किलोमीटर तक के व्यास के आकार के होते हैं. जहां सौर ज्वाला सूर्य पर होने वाले विशाल विस्फोटों को कहा जाता है, वहीं CME सूर्य से निकला विशाल प्लाज्मा का बुलबुला होता है.

किसने ली इस धब्बे की तस्वीर
वर्तमान में हो रही इस परिघटना का के बारे में AR2770 की साफ तस्वीर बेहतर जानकारी दे रही है. यह तस्वीर ट्रेन्टोन, फ्लोरिडा के एक शौकिया खगलोविद मार्टिन वाइज ने खींची हैं. इसके प्राइमरी कोर का आकार मंगल ग्रह के आकार के बराबर है. इसमें कई छोटे धब्बे हैं जो चंद्रमा की सतह के क्रेटर की तरह दिखाई दे रहे हैं.
कैसे ली गई इस धब्बे की तस्वीर
वाइज ने इस काले सनस्पॉट की तस्वीर एक 8 इंच के टेलीस्कोप से खींची हैं जिसमें उन्होंने सोलर फिल्टर्स लगाए थे. इसके आकार के कारण इसे वर्तमान सोलर मिनिमम में अब तक के सबसे बड़ा सनस्पॉट माना जा रहा है. इस स्पॉट के बढ़ने और इसके पृथ्वी की ओर होने से उसकी ज्वालाएं बड़ा प्रभाव डालते हुए पृथ्वीकी बिजली और उससे संबंधित सुविधाओं पर विपरीत असर डाल सकती हैं.

कैसा होगा इसका असर
वहीं इसका असर के बारे में नेशनल ओसियानिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेसन (NOAA) का कहना है कि यह सौरतूफान अंतरिक्ष में विद्युत धारा में बदलाव या उतार चढ़ाव पैदा कर सकते हैं. इसके अलावा ये पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड में मौजूद इलेक्ट्रॉन औरप्रोटॉन को भी ऊर्जावान कर सकते हैं.
माना जाता है की इन घटनाओं से रेडियो संचार, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS), पॉवर ग्रिड और सैटेलाइट आदि का कामकाज प्रभावित हो सकता है
क्या अहमियत है इन धब्बों कीसनस्पॉट सूर्य पर वे काले धब्बे होते हैं जो बाकी तारे के मुकाबले ठंडे होते हैं. ये सूर्य की मैग्नेटिक फील्ड की सतह से अंतरक्रिया के कारण पैदा होते हैं. इन तीव्र मैग्नेटिक गतिविधियों का नतीजा यह होता है कि इनसे बहुत ही विशाल मात्रा में ऊर्जा निकलती है जिसे सौरज्वाला (Solar flare) या सौर तूफान (Solar storms) या कोरोनल मास इजेक्शन्स (CME) भी कहते हैं.
कितने बड़े होते हैं ये
अभी तक इस पूरी प्रक्रिया को अच्छे से समझा नहीं जा सका है, लेकिन ये धब्बे सूर्य की फोटोस्फियर इलाके में बनते हैं और ये 50 हजार किलोमीटर तक के व्यास के आकार के होते हैं. जहां सौर ज्वाला सूर्य पर होने वाले विशाल विस्फोटों को कहा जाता है, वहीं CME सूर्य से निकला विशाल प्लाज्मा का बुलबुला होता है.
किसने ली इस धब्बे की तस्वीर
वर्तमान में हो रही इस परिघटना का के बारे में AR2770 की साफ तस्वीर बेहतर जानकारी दे रही है. यह तस्वीर ट्रेन्टोन, फ्लोरिडा के एक शौकिया खगलोविद मार्टिन वाइज ने खींची हैं. इसके प्राइमरी कोर का आकार मंगल ग्रह के आकार के बराबर है. इसमें कई छोटे धब्बे हैं जो चंद्रमा की सतह के क्रेटर की तरह दिखाई दे रहे हैं.
कैसे ली गई इस धब्बे की तस्वीर
वाइज ने इस काले सनस्पॉट की तस्वीर एक 8 इंच के टेलीस्कोप से खींची हैं जिसमें उन्होंने सोलर फिल्टर्स लगाए थे. इसके आकार के कारण इसे वर्तमान सोलर मिनिमम में अब तक के सबसे बड़ा सनस्पॉट माना जा रहा है. इस स्पॉट के बढ़ने और इसके पृथ्वी की ओर होने से उसकी ज्वालाएं बड़ा प्रभाव डालते हुए पृथ्वीकी बिजली और उससे संबंधित सुविधाओं पर विपरीत असर डाल सकती हैं.
कैसा होगा इसका असर
वहीं इसका असर के बारे में नेशनल ओसियानिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेसन (NOAA) का कहना है कि यह सौरतूफान अंतरिक्ष में विद्युत धारा में बदलाव या उतार चढ़ाव पैदा कर सकते हैं. इसके अलावा ये पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड में मौजूद इलेक्ट्रॉन औरप्रोटॉन को भी ऊर्जावान कर सकते हैं.
माना जाता है की इन घटनाओं से रेडियो संचार, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS), पॉवर ग्रिड और सैटेलाइट आदि का कामकाज प्रभावित हो सकता है