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Wednesday, June 3, 2020

सहरसा।हादसे का गवाह बन सकता है रेल फाटक


सहरसा। पूर्व-मध्य रेल में मानव रहित रेल फाटक पर बराबर दुर्घटना घटित होने पर रेल प्रशासन ने सभी मानव रहित रेल फाटक को मानव सहित रेल फाटक बना दिया है। हर रेल गुमटी और ढाला पर रेलकर्मी की तैनाती कर दी है। सभी रेल फाटकों पर मानव की ड्यूटी लगा दी गयी है। जिससे अब दुर्घटना में कमी आयी है। शहर के बंगाली बाजार रेलवे ढाला सहित शिवपुरी, कचहरी ढाला, सर्वा ढाला पर भी ट्रेन के आने व जाने के समय बैरियर गिरे रहने के बाद भी लोग आराम से बैरियर के नीचे से दो पहिया वाहन सहित पैदल आवाजाही करते रहते है। जो कभी भी हादसे का गवाह बन सकता है। ट्रेन की स्पीड इतनी अधिक रहती है कि जब तक आप समझेंगे हम निकल जाएंगे तब तक ट्रेन गुजर जाती है और इसी में जान माल की क्षति होती है। शहरी क्षेत्र में जब लोग जागरूक नहीं है तो ग्रामीण क्षेत्र में रेल गुमटी पर बैरियर गिरे रहने के बाद क्या होता होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। रेलवे ने तो गेटमेन की तैनाती कर अपना कार्य तो सुरक्षित कर लिया लेकिन इसमें लोगों को भी सजग होना पडेगा। बैरियर बंद रहने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में जानवर, बाइक, ट्रॉली आदि तो बगल से निकाल कर आवाजाही करते है। जो किसी खतरे से कम नहीं है।

मिली जानकारी के मुताबिक, सहरसा से मानसी रेलखंड के बीच 21 मानव रेल फाटक, सहरसा-मुरलीगंज रेल खंड के बीच 22 एवं सहरसा-सुपौल रेल खंड के बीच 20 रेल मानव फाटक है। अगर समय रहते रेल प्रशासन ने इसपर रोक नहीं लगायी तो कभी भी हादसा होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।