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Tuesday, April 28, 2020

बिहार के लाल ने कोरोना से रोकथाम के लिए बनाया डिवाइस, जो देगा कोरोना को मात


लखीसराय. कोविड-19 महामारी (COVID-19 Epidemic) का प्रकोप थमने का नाम नही ले रहा है. इस त्रासदी से बचाने के लिए डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिसकर्मी, सरकार समेत पूरी दुनिया के लोग भरपूर प्रयास कर रहे हैं. ऐसे मे कोरोना संक्रमण (Corona Infections) के खिलाफ इस लड़ाई मे एक महत्वपूर्ण प्रयास भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (Bhagalpur Engineering College) के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्यूनिकेशन ब्रांच के सेकेंड इयर के छात्र गौरव कुमार ने किया है. मूलरूप से लखीसराय जिले के बड़हिया के निवासी गौरव कुमार ने मोबाइल, चार्जर, घड़ी समेत दूसरे छोटे उपकरणों को कोरोना समेत दूसरे वायरस वैक्टिरिया से संक्रमण मुक्त करने के एक इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस का निर्माण किया है.

कोरोना वायरस से भारत समेत विश्व के ज्यादातर देश परेशान हैं. वैज्ञानिकों की टीम इस बीमारी से निजात दिलाने के लिए दिन रात काम कर रही है. वैज्ञानिक वैक्सीन पर काम कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि जबतक वैक्सीन बन नहीं जाता तब तकइसका कोई परमानेंट सौल्यूसन नहीं होगा. अब तक इस बीमारी से दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं. अकेले अमेरिका में 50 हजार से ज्यादा लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है. इधर प्रदेश के भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्यूनिकेशन ब्रांच के सेकेंड इयर के छात्र गौरव कुमार ने एक डिवाइस का निर्माण किया है जो कोरोना वायरस के रोकथाम में मददगार साबित हो सकता है.

अपने इस डिवाइस को लेकर गौरव ने बताया कि छोटे-मोटे समान को इस डिवाइस में रखने के बाद कोरोना नष्ट हो जाता है. इस उपकरण में अल्ट्रावायलेट किरण निकलने वाले लैंप को लगाया गया है. उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमित उपकरण की सतह को 40-45 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करने के लिए हीटल व फैन भी लगाया गाय है. उन्होंने यह भी बताया कि इस कोविड -19 विफेंडर को व्यवसायिक प्रयोग के लिए भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज की ओर से इंडियन मेडिकल रिसर्च काउंसिल भेजा जाएगा.

गौरव कुमार ने बताया कि विश्व स्वास्थ संगठन की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस का साइज 0.4-0.02 माइक्रोन के आसपास का होता है. उन्होंने कहा कि वायरस का बाहरी सतह काफी कमजोर होता है. जो 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में नष्ट हो जाता है. ऐसे में अल्ट्रावायलेट किरण के प्रहार से भी इसका जीवन समाप्त हो जाता है. उन्होंने कहा कि इसे वैज्ञानिक पहलू को ध्यान में ऱखकर निर्माण किया गया है.