कोशी लाइव_नई सोच नई खबर।
रितेश हन्नी।
सहरसा - सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान कवरेज से जिले के दर्जनों प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े कई पत्रकार वंचित रहेंगें। सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर कवरेज पत्र जमा करने के बाद भी दर्जनों मीडियाकर्मी का पास नही बनाया गया। डीपीआरओ की मनमानी के विरोध में हमलोग आंदोलन करेंगे। जिसमे जिले के कई पत्रकार इस निर्णय में साथ हैं। हम कानून पसंद व्यक्ति हैं और डीपीआरओ अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं लाकर मनमानी कर राजनीति कर रहे हैं। डीपीआरओ के द्वारा अपने चहेते को प्रेस पास निर्गत किया गया है। हम हाथ पर हाथ घरे नहीं बैठेंगे और अब आर-पार की लड़ाई होगी। आचार संहिता के कारण आंदोलन को रोका गया। इस समय पत्रकारिता में कुछ ऐसे लोग प्रवेश कर गए हैं जिनका पत्रकारिता से कोई लेना-देना नहीं है। शुद्ध दलाली कर रहे हैं, ऐसे दलालों का विरोध होना ही चाहिए। कुछ एक कि वजह से पत्रकारिता और पत्रकारों की छवि ध्वस्त होने के कगार पर पहुंच गई है। वैसे शहर में दलाल पत्रकारों में गजब की एकता है। ये चील-कौवों की तरह मंडराते कभी भी कहीं भी देखे जा सकते हैं, इसकी भी जांच आवश्यक है। दुष्ट लोगों की सक्रियता समाज को बर्बाद नहीं करती, बल्कि हमेशा अच्छे लोगों की निष्क्रियता समाज को बर्बाद करती है। गलत का विरोध हो इससे कोई समझौता नहीं होना चाहिए। ऐसा नहीं कि सहरसा में अच्छे पत्रकार नहीं हैं, अच्छे पत्रकार भी हैं। उन्हें चुप्पी तोड़कर गलत का विरोध करना चाहिए। सहरसा के एक उच्च पदस्त पदाधिकारी को कतिपय पत्रकारों से डर लगता है इसी के कारण प्राधिकार पत्र वितरण में भी जातीय व दबंगता की राजनीति हूई है।
*डीएम, एसपी, एसडीओ, सदर एसडीपीओ है अच्छे पदाधिकारी*
जिले में जिलाधिकारी, एसपी, सदर एसडीओ, एसडीपीओ अच्छे पदाधिकारी हैं। उन्हें इस दिशा में हस्तक्षेप करनी की आवश्यकता है।
रितेश हन्नी।
सहरसा - सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान कवरेज से जिले के दर्जनों प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े कई पत्रकार वंचित रहेंगें। सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर कवरेज पत्र जमा करने के बाद भी दर्जनों मीडियाकर्मी का पास नही बनाया गया। डीपीआरओ की मनमानी के विरोध में हमलोग आंदोलन करेंगे। जिसमे जिले के कई पत्रकार इस निर्णय में साथ हैं। हम कानून पसंद व्यक्ति हैं और डीपीआरओ अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं लाकर मनमानी कर राजनीति कर रहे हैं। डीपीआरओ के द्वारा अपने चहेते को प्रेस पास निर्गत किया गया है। हम हाथ पर हाथ घरे नहीं बैठेंगे और अब आर-पार की लड़ाई होगी। आचार संहिता के कारण आंदोलन को रोका गया। इस समय पत्रकारिता में कुछ ऐसे लोग प्रवेश कर गए हैं जिनका पत्रकारिता से कोई लेना-देना नहीं है। शुद्ध दलाली कर रहे हैं, ऐसे दलालों का विरोध होना ही चाहिए। कुछ एक कि वजह से पत्रकारिता और पत्रकारों की छवि ध्वस्त होने के कगार पर पहुंच गई है। वैसे शहर में दलाल पत्रकारों में गजब की एकता है। ये चील-कौवों की तरह मंडराते कभी भी कहीं भी देखे जा सकते हैं, इसकी भी जांच आवश्यक है। दुष्ट लोगों की सक्रियता समाज को बर्बाद नहीं करती, बल्कि हमेशा अच्छे लोगों की निष्क्रियता समाज को बर्बाद करती है। गलत का विरोध हो इससे कोई समझौता नहीं होना चाहिए। ऐसा नहीं कि सहरसा में अच्छे पत्रकार नहीं हैं, अच्छे पत्रकार भी हैं। उन्हें चुप्पी तोड़कर गलत का विरोध करना चाहिए। सहरसा के एक उच्च पदस्त पदाधिकारी को कतिपय पत्रकारों से डर लगता है इसी के कारण प्राधिकार पत्र वितरण में भी जातीय व दबंगता की राजनीति हूई है।
*डीएम, एसपी, एसडीओ, सदर एसडीपीओ है अच्छे पदाधिकारी*
जिले में जिलाधिकारी, एसपी, सदर एसडीओ, एसडीपीओ अच्छे पदाधिकारी हैं। उन्हें इस दिशा में हस्तक्षेप करनी की आवश्यकता है।

