20 दिन में बाघों ने 3 लोगों को बनाया शिकार, 2 की गर्दन पर हमला; VTR से सटे इलाकों में बढ़ी दहशत
ग्राउंड रिपोर्ट: खेतों और रिहाइशी इलाकों तक पहुंच रहे बाघ, जंगल का क्षेत्र कम पड़ने से बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष; 30 जुलाई से 15 अगस्त के बीच तीन लोगों की मौत
पश्चिमी चंपारण के बगहा में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) से सटे इलाकों में बाघों की दहशत लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले करीब 20 दिनों में बाघों के हमले में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें दो लोगों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि एक घायल ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों के मुताबिक, खेतों में काम करने और पशुओं के लिए चारा काटने के दौरान लोगों पर बाघ हमला कर रहे हैं। कई इलाकों में ग्रामीण लाठी-डंडे और भाले लेकर भी जंगल से सटे खेतों में जाने को मजबूर हैं। लगातार हो रही घटनाओं ने ग्रामीणों में डर का माहौल पैदा कर दिया है।
30 जुलाई को अकलू यादव पर हमला
वाल्मीकि नगर के विसहा निवासी अकलू यादव 30 जुलाई की दोपहर करीब 3 बजे बकरियों के साथ घर से निकले थे। करीब आधे घंटे पैदल चलने के बाद वे मलखंता सरेह पहुंचे। यह इलाका VTR से सटा हुआ है।
अकलू अपनी बकरियों को छोड़कर करीब 100 मीटर दूर एक पेड़ की छांव में आराम करने लगे। उनके आसपास खेतों में कुछ अन्य लोग भी काम कर रहे थे। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 10 मिनट बाद बाघ ने अकलू के पैरों पर हमला कर उन्हें झाड़ियों की तरफ खींचना शुरू कर दिया।
अकलू की चीख सुनकर आसपास मौजूद लोग लाठी-डंडे लेकर दौड़े। करीब दो मिनट तक ग्रामीण बाघ पर लाठियां बरसाते रहे। आखिरकार बाघ अकलू को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया।
अकलू के पैर में गंभीर चोटें आई थीं और मांस बुरी तरह नोच लिया गया था। उन्हें पहले बगहा अस्पताल और फिर गोरखपुर रेफर किया गया। इलाज के दौरान उसी शाम उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद जंगल में एक बाघ मृत मिला था। वन विभाग ने मामले की जांच की। अधिकारियों के अनुसार, अकलू के जमीन पर लेटे होने से बाघ ने उन्हें आसान शिकार समझकर हमला किया होगा।
उमरावती देवी को गर्दन से दबोचकर ले गया बाघ
इसी दिन 30 जुलाई की सुबह नौरंगिया निवासी रामायण साहनी की पत्नी उमरावती देवी खेत में काम करने गई थीं। परिजनों के अनुसार, वह खरपतवार निकालने के लिए खेत में झुककर काम कर रही थीं।
इसी दौरान पीछे से बाघ ने उनकी गर्दन पर हमला कर दिया और उन्हें उठाकर गन्ने के खेत की तरफ ले गया। जब परिजन उन्हें खोजते हुए वहां पहुंचे तो काफी मात्रा में खून मिला।
ग्रामीणों ने लाठी-डंडे लेकर गन्ने के खेत की ओर बढ़कर शोर मचाया। लोगों की मौजूदगी महसूस होते ही बाघ वहां से भाग गया। बाद में उमरावती देवी का शव खेत में मिला।
इस घटना ने आसपास के गांवों में बाघों को लेकर दहशत और बढ़ा दी।
15 अगस्त को विजय हालदार की मौत
तीसरी घटना 15 अगस्त की सुबह हुई। विजय हालदार अपने भाई वीरेंद्र हालदार के साथ पशुओं के लिए चारा काटने निकले थे। दोनों जंगल से करीब 200 मीटर पहले अलग-अलग स्थानों पर चारा काटने लगे।
चारा काटने के बाद वीरेंद्र को लगा कि विजय चारा लेकर घर लौट गए होंगे। वह भी घर पहुंच गए, लेकिन करीब 9:30 बजे तक विजय घर नहीं पहुंचे।
विजय की पत्नी ने जब इसकी जानकारी वीरेंद्र को दी तो उन्होंने छह ग्रामीण युवकों के साथ लाठी और भाले लेकर विजय की तलाश शुरू की।
ग्रामीण सबसे पहले उस खेत में पहुंचे जहां विजय चारा काटने गए थे। वहां उन्हें खून के गीले और सूखे निशान तथा बाल दिखाई दिए। इसी दौरान उन्हें कुछ दूरी से बाघ के हांफने की आवाज सुनाई दी।
ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ देर बाद बाघ जंगल की ओर जाता दिखाई दिया। ग्रामीणों ने उसे दौड़ाने की कोशिश की, लेकिन वह भाग गया। लौटते समय एक झाड़ी के पास विजय का शव मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि बाघ ने उनकी गर्दन पर हमला किया था और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
VTR का क्षेत्र बाघों के लिए कम पड़ रहा?
विशेषज्ञों के अनुसार, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का क्षेत्र करीब 900 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यहां बाघों की संख्या बढ़ी है। उपलब्ध क्षेत्र और बाघों की संख्या के बीच संतुलन बिगड़ने से नर बाघों के लिए पर्याप्त क्षेत्र की कमी महसूस हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय संघर्ष के कारण बाघ अपने इलाके से बाहर निकलकर जंगल से सटे खेतों और रिहाइशी क्षेत्रों में पहुंच सकते हैं। इन इलाकों में लोगों का लगातार आना-जाना मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा कर देता है।
खेतों में काम करने वाले लोगों पर सबसे ज्यादा खतरा
VTR से सटे इलाकों में बड़ी संख्या में ग्रामीण खेती, पशुपालन और चारा काटने के लिए जंगल की सीमा के आसपास जाते हैं। बाघ के लिए झाड़ियों, गन्ने और ऊंची घास वाले खेत छिपने और हमला करने के लिए अनुकूल जगह बन जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, खेतों में झुककर काम करने या जमीन पर लेटने से इंसान की आकृति बाघ को अलग दिखाई दे सकती है। ऐसे में बाघ उसे अपने सामान्य शिकार जैसा समझकर हमला कर सकता है।
लगातार घटनाओं से ग्रामीणों में भय
20 दिनों के भीतर तीन लोगों की मौत ने VTR से सटे गांवों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के आसपास खेतों में काम करना अब जोखिम भरा महसूस हो रहा है।
वन विभाग की ओर से बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने और प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। साथ ही ग्रामीणों को भी जंगल और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में अकेले नहीं जाने तथा बाघ की मौजूदगी की सूचना मिलने पर सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
मानव बस्तियों के आसपास बाघों की बढ़ती गतिविधियां अब केवल वन विभाग के लिए ही नहीं, बल्कि जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं।