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'महिलाओं का सम्मान सर्वोपरि, न्याय के बिना कानून अधूरा' — कवयित्री चांदनी झा ने महिला सुरक्षा पर उठाए सवाल
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महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय को लेकर कवयित्री चांदनी झा ने एक भावनात्मक और तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी कानून स्वीकार्य नहीं हो सकता, जो महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करने में असफल साबित हो। उनका कहना है कि कानून का उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि हर पीड़ित को निष्पक्ष न्याय दिलाना होना चाहिए।
चांदनी झा ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज देश में छोटी-छोटी बच्चियों, छात्राओं और महिलाओं के साथ दुष्कर्म, छेड़छाड़ और यौन अपराधों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में यदि पीड़िताओं को न्याय नहीं मिलता या कानून उनके सम्मान की पर्याप्त रक्षा नहीं करता, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि स्त्री के शरीर और सम्मान की रक्षा करना समाज और न्याय व्यवस्था दोनों की जिम्मेदारी है। किसी भी महिला की इच्छा के विरुद्ध उसके शरीर को छूना भी उसकी गरिमा का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में कानून को संवेदनशील और पीड़िता के अधिकारों की रक्षा करने वाला होना चाहिए।
कवयित्री ने कहा कि कानून बनाते समय यह नहीं भूलना चाहिए कि हर व्यक्ति का जन्म एक महिला की कोख से होता है। इसलिए महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी पीड़िता के दर्द को वही समझ सकता है, जिसने उसे करीब से महसूस किया हो।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर समाज में विश्वास कमजोर होगा, तो इसका असर उनकी शिक्षा, स्वतंत्रता और सामाजिक भागीदारी पर पड़ेगा। इससे महिलाएं फिर से भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हो सकती हैं।
चांदनी झा ने देश की महिलाओं से लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और न्याय के लिए समाज को एकजुट होकर आगे आना चाहिए तथा ऐसी व्यवस्था की मांग करनी चाहिए, जिसमें हर महिला स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सके।
अंत में उन्होंने "नारी शक्ति जिंदाबाद" का नारा देते हुए महिलाओं के सम्मान और समान अधिकारों की वकालत की।
नोट: यह लेख कवयित्री चांदनी झा द्वारा व्यक्त विचारों पर आधारित है। इसमें व्यक्त मत उनके व्यक्तिगत विचार हैं।