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300 फीट गहरे बोरवेल में 7 घंटे तक जिंदगी की जंग लड़ता रहा मासूम पियूष, 'बड़ी मम्मी, बाहर निकाल दो' सुन छलक पड़े सबके आंसू
गया। जिले के फतेहपुर प्रखंड के गुरपा थाना क्षेत्र स्थित रंगून नगर गांव में तीन वर्षीय मासूम पियूष ने अद्भुत साहस का परिचय दिया। करीब 300 फीट गहरे बोरवेल में गिरने के बाद वह लगभग 30 फीट की गहराई पर फंस गया, लेकिन पूरे सात घंटे तक उसने हिम्मत नहीं हारी। बोरवेल के अंदर से वह लगातार अपनी बड़ी मां रंजू देवी को आवाज लगाते हुए कहता रहा, "बड़ी मम्मी, बाहर निकाल दो।" मासूम की यह पुकार सुनकर परिवार के लोगों की आंखें नम हो गईं।
जानकारी के अनुसार, पियूष अपनी मां प्रमिला देवी के साथ खेत की ओर जा रहा था। उसके एक हाथ में मोबाइल था और दूसरे हाथ से वह अपनी मां का हाथ पकड़े हुए था। इसी दौरान बोरे से ढके खुले बोरवेल में उसका पैर फिसल गया और वह गहरे बोरवेल में जा गिरा। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और घंटों तक चले अभियान के बाद बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
रेस्क्यू पूरा होने के बाद पियूष सबसे पहले अपनी बड़ी मां के पास पहुंचा। वहीं उसकी मां प्रमिला देवी बेटे को सुरक्षित देखकर भावुक हो गईं। बच्चे को तत्काल फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी प्राथमिक जांच की। घटना की सूचना मिलने के बाद महाराष्ट्र में नौकरी कर रहे उसके पिता दिनेश मांझी भी घर के लिए रवाना हो गए।
मां प्रमिला देवी ने बताया कि सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि पियूष पूरे सात घंटे तक बोरवेल के अंदर अपने हाथ में मोबाइल पकड़े रहा। जब उसे बाहर निकाला गया, तब भी मोबाइल उसके हाथ में था। उन्होंने कहा कि इतनी छोटी उम्र में भी बेटे ने जिस साहस और धैर्य का परिचय दिया, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है।
अस्पताल में इलाज के दौरान भी पियूष की मासूमियत देखने को मिली। अस्पताल के एक गार्ड ने उसके लिए सेवई मंगवाई, लेकिन उसने मुस्कुराते हुए कहा, "चम्मच रहेगा तभी खाऊंगा।" इसके बाद उसकी मां ने उसे पूरी और सेवई खिलाई।
शुक्रवार सुबह बच्चे के पैर में सूजन आने पर उसे बेहतर इलाज के लिए मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया। फतेहपुर सीएचसी के चिकित्सक डॉ. पल्लव चौबे ने बताया कि पियूष की स्थिति पूरी तरह सामान्य है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक पैर एक ही स्थिति में मुड़ा रहने के कारण सूजन आ गई है। एहतियात के तौर पर उसे बड़े अस्पताल भेजा गया है, जहां विस्तृत जांच और निगरानी की जाएगी। प्रशासन ने राहत जताई कि समय रहते चले सफल रेस्क्यू अभियान ने मासूम की जान बचा ली।