उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सदन में विभागीय बजट पर चर्चा के दौरान बताया कि भूमि विवादों में पुलिस की भूमिका सीमित कर दी गयी है. अब केवल कानून-व्यवस्था की स्थिति बनने पर या राजस्व अधिकारी के अनुरोध पर ही पुलिस हस्तक्षेप करेगी.जमीन मामलों के समाधान के लिए अंचल कार्यालयों में विशेष शिविर लगेंगे, जिससे लोगों को थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
मार्च से शुरू होगा जनसंवाद
जमीन संबंधी समस्याओं को करीब से सुनने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए मार्च महीने से जिलावार जनसंवाद की शुरुआत होने जा रही है. उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा खुद प्रत्येक जिले का दौरा करेंगे और रैयतों (जमीन मालिकों) की शिकायतें सुनेंगे.
पहले यह संवाद डिविजन स्तर पर होता था, लेकिन अब इसकी पहुंच को विस्तार देते हुए इसे जिला स्तर पर ले जाया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य है कि विवाद रहित दाखिल-खारिज (Mutation) के मामलों को मात्र 14 दिनों के भीतर निपटाया जाए, ताकि विकास कार्यों में कोई बाधा न आए.
सुधार में तेजी का दावा,लंबित मामलों के निपटारे का लक्ष्य
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि ऑनलाइन दाखिल-खारिज मामलों के समाधान की दर 75 प्रतिशत से बढ़कर 84 प्रतिशत हो चुकी है, विवाद रहित मामलों के लिए 14 दिन की समयसीमा तय की गई है. परिमार्जन प्लस अभियान में भी सुधार दर 10 प्रतिशत से बढ़कर 75 प्रतिशत तक पहुंचने का दावा किया गया.
सरकार के अनुसार दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 40 लाख लंबित आवेदनों में से 11.50 लाख का निष्पादन किया जा चुका है. लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक सभी 46 लाख लंबित मामलों को निपटा दिया जाए. किसानों के लिए चलाए गए अभियान में मात्र 35 दिनों में 40 लाख रजिस्ट्रेशन भी दर्ज किए गए.
डिजिटाइजेशन की गड़बड़ियों पर नकेल
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्वीकार किया कि जमीन के रिकॉर्ड्स को डिजिटल करने वाली पुरानी एजेंसियों ने कई गलतियां की हैं, जिससे रैयतों के नाम और रकबे में त्रुटियां आई हैं. इन सुधारों के लिए 'परिमार्जन प्लस' पोर्टल को और मजबूत किया गया है, जिसकी सफलता दर 10% से बढ़कर अब 75% तक पहुंच गई है.
सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक सभी 46 लाख लंबित मामलों को पूरी तरह निपटाने का है. जाली दस्तावेजों के आधार पर जमीन हड़पने वालों के खिलाफ अब सीधे FIR दर्ज कराई जाएगी, जिससे भू-माफियाओं पर लगाम कसी जा सकेगी.
भूमि बैंक और सर्वेक्षण पर जोर
बिहार में फिलहाल 1890-1920 के कैडेस्ट्रल सर्वे के आधार पर काम हो रहा है, जिसे अपडेट करने के लिए अब विशेष सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है. शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक और राहत की खबर यह है कि अब वंशावली निर्गत करने की जिम्मेदारी सीधे CO को सौंप दी गई है.
इसके साथ ही, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रत्येक जिले में 'भूमि बैंक' बनाया जा रहा है, ताकि सरकारी और औद्योगिक कार्यों के लिए जमीन की उपलब्ध हो सके.