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वायरल वीडियो पॉक्सो केस में सुपौल कोर्ट का सख्त फैसला, आरोपी गणेश मेहता को कई धाराओं में 7-7 साल तक की कठोर कैद
सुपौल।
जिले के करजाइन थाना कांड संख्या 132/24 एवं पॉक्सो वाद संख्या 105/24 से जुड़े चर्चित वायरल वीडियो मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी को सख्त सजा सुनाई है। गुरुवार को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम सह विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) संतोष कुमार दुबे की अदालत ने करजाइन थाना क्षेत्र निवासी आरोपी गणेश मेहता को विभिन्न गंभीर धाराओं में दोषी करार देते हुए कठोर कारावास और भारी जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 126(2) के तहत एक माह का साधारण कारावास एवं 5 हजार रुपये जुर्माना, धारा 127(2) के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माना, धारा 115(2) के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माना सुनाया। वहीं धारा 74 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माना, धारा 75 के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 76 के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
इसके अलावा धारा 333 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हजार रुपये जुर्माना, धारा 351(2) के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माना, धारा 352 के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई।
पॉक्सो अधिनियम के तहत भी आरोपी को कठोर दंड दिया गया। अदालत ने पॉक्सो की धारा 8 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हजार रुपये जुर्माना, धारा 10 के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 12 के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माना सुनाया। इसके साथ ही बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 10 के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास एवं 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
वहीं एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(आर)(एस)(डब्ल्यू) के तहत तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास और प्रत्येक धारा में 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक नीलम कुमारी ने सशक्त दलीलें पेश कीं, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रवीण कुमार मेहता ने बहस की। गौरतलब है कि इस मामले में कुल 10 अभियुक्त थे, जिनमें से 8 आरोपियों को 15 जनवरी 2026 को ही दोषी ठहराया जा चुका है। सुनवाई के दौरान कुल 13 गवाहों ने न्यायालय में अपना बयान दर्ज कराया।
न्यायालय के इस फैसले को बाल अपराध और यौन शोषण के मामलों में सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।