आरोपी लिपिक को निगरानी के धावादल ने उसके कार्यालय कक्ष से तब दबोचा जब वह 2,000 रुपये रिश्वत ले रहा था।
पूरा मामला अवकाश के दिनों की उपस्थिति दर्ज करने से जुड़ा है। गया जिले की कोठी निवासी परिवादिनी श्रीमती अर्चना कुमारी ने ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी कि अक्टूबर-नवंबर 2025 में लिए गए अवकाश के बाद जब वह ड्यूटी पर लौटीं, तो आरोपी लिपिक उनकी और स्टाफ नर्स जूली की हाजिरी बनाने के बदले पैसों की मांग कर रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित अवकाश के दिनों का वेतन भुगतान पहले ही किया जा चुका था।
ब्यूरो द्वारा शिकायत के सत्यापन में रिश्वत मांगे जाने का प्रमाण सही पाए जाने के बाद, पुलिस उपाधीक्षक आदित्य राज के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया, जिसने इस ट्रैप को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी ब्यूरो की यह नौवीं प्राथमिकी है। अब तक ब्यूरो 75,000 रुपये की कुल रिश्वत राशि बरामद कर चुका है और 6 अभियुक्तों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है।