बिहार में जमीन मापी के प्रोसेस को आसान बनाने को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ी घोषणा की है. उन्होंने एक्स के जरिए पोस्ट शेयर कर बताया कि राज्य में जमीन मापी कराने के लिए लोगों की तरफ से आवेदन देने के बाद जमीन मापी की प्रक्रिया संपन्न होने में काफी वक्त लग जाता है.
इस कारण लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
जमीन की समय पर मापी नहीं होने के कारण अनावश्यक जमीन विवाद उत्पन्न हो रहे हैं. ऐसे में 'सबका सम्मान-जीवन आसान' (Ease of Living) के लक्ष्य को पाने के लिए जमीन मापी की प्रक्रिया को अधिक आसान, पारदर्शी और समय पर कराने के लिए फैसले लिए गए हैं.
सीएम नीतीश ने किए ये फैसले
- 31 जनवरी 2026 तक जमीन मापी के लिए लंबित आवेदनों का निपटारा विशेष भूमि मापी अभियान चलाकर कर दिया जाएगा.
- 1 अप्रैल 2026 से अविवादित जमीन की मापी के लिए आवेदक की तरफ से मापी शुल्क जमा किए जाने के अधिकतम 7 कार्य दिवस में जमीन की मापी सुनिश्चित की जाएगी. साथ ही विवादित जमीन की मापी के लिए आवेदक की तरफ से मापी शुल्क जमा किए जाने के अधिकतम 11 कार्य दिवस में जमीन की मापी सुनिश्चित की जाएगी.
- अविवादित और विवादित जमीन की निर्धारित कार्य दिवस में मापी की प्रक्रिया पूरी कर अमीन की तरफ से मापी की रिपोर्ट मापी के बाद आवेदक के आवेदन की डेट के 14वें दिन निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी होगा.
- तय समय सीमा के अंदर जमीन मापी सुनिश्चित करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से आवश्यक कर्मचारियों और संसाधनों की व्यवस्था के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया के ऑब्जर्वेशन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी.
सीएम नीतीश ने लोगों से मांगे सुझाव
सीएम नीतीश ने विश्वास जताया कि जमीन मापी प्रक्रिया को आसान बनाने से जुड़ी यह पहल पूरे बिहार के लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी. सीएम नीतीश ने लोगों से सुझाव भी मांगा. उन्होंने लिखा, इस बारे में अगर आप कोई जरूरी सुझाव देना चाहते हैं तो 25 जनवरी 2026 तक अपने सुझाव मेल आईडी- cm-secretariat-bih@gov.in पर दे सकते हैं.