मधेपुरा। जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र में इन दिनों नीलगायों के उत्पात से किसान परेशान हैं। ग्राम पंचायतों के माध्यम से वन विभाग के सहयोग से शूटर बुलाकर नीलगायों को शूट किया जा रहा है। कुरसंडी पंचायत के मुखिया कुंदन सिंह ने बताया कि नीलगायों व जंगली सूअरों को शूट कराने के लिए पंचायत से फंड जारी किया जाता है। इसकी विधिवत प्रक्रिया अपनाई जाती है। प्रखंड व अंचल से लेकर वन विभाग तक से एनओसी लेने के बाद बाहर से शूटर मंगवाना पड़ता है। प्रत्येक नीलगाय को शूट कराने पर शूटर को 750 रुपये और प्रत्येक जंगली सूअर को शूट कराने पर 1250 रुपये दिए जाने का प्रविधान है। इसके बाद दफ्न करने की प्रक्रिया में ठीक इतना ही खर्च आता है। प्रत्येक नीलगाय पर 750 रुपये और जंगली सूअर पर 1250 रुपये से खर्च किया जाना है।
उदाकिुशुनगंज व पुरैनी में 51 नीलगायों को किया शूट
बुधवार दोपहर को उदाकिशुनगंज प्रखंड की शाहजादपुर पंचायत में एक 47 नीलगायों को शूट किया गया। वहीं शाम में पुरैनी प्रखंड की कुरसंडी पंचायत में चार नीलगायों को शूट किया गया। कुरसंडी पंचायत में गुरुवार को भी शूट किया जाना है। इससे पूर्व 7-8 जनवरी को आलमनगर प्रखंड की खुरहान पंचायत क्षेत्र में 27 नीलगायों को शूट किया गया था। इससे किसानों को राहत मिल रही है। नीलगायों के द्वारा खासकर मक्का और गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। हालांकि अब भी आलमनगर की बिसपट्टी पंचायत के चंद्रसारा एवं खुरहान पंचायत के बहियार में नीलगाय का उत्पात जारी है।
इसके तुरंत बाद दोनों शूटर पुरैनी प्रखंड पहुंचे। यहां कुरसंडी पंचायत के मुखिया कुंदन सिंह ने ग्रामीणों के आवेदन पर नीलगायों को शूट करने के लिए वन विभाग से मांग की थी। शूटर अनिल सिंह ने बताया कि शाम होने की वजह से कुरसंडी बहियार में बुधवार को महज चार नीलगायाें को शूट किया गया। मुखिया कुंदन सिंह ने कहा कि इलाके के किसान काफी दिनों से परेशान हैं। हमारे यहां गुरुवार को भी कार्रवाई की जाएगी। गुरुवार को फाइनल आकंड़ा मिल पाएगा।
आलमनगर की खुरहान पंचायत में 27 नीलगायों को किया जा चुका है शूट
गत सात एवं आठ जनवरी को खुरहान बहियार में शूटरों ने 27 नीलगायों को शूट कर किसानों को राहत पहुंचाई थी। जिसके बाद किसानों ने शूटर आलोक कुमार सिंह और संजीव कुमार सिंह को मोमेंटो देकर सम्मानित किया था। पंचायत की मुखिया मंजू देवी के आवेदन पर यह कार्रवाई की गई थी। फोरेस्टर ने बताया कि इस तरह के अभियान के लिए पंचायत के मुखिया को जिला एवं वरीय पदाधिकारी से परमिशन लेना पड़ता है। इसके बाद करवाई होती है।