आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व सीएम राबड़ी देवी के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव अचानक से राजनीतिक सुर्खियों में आ गए हैं. चर्चा है कि परिवार और पार्टी से निकाले जाने के बाद तेजप्रताप यादव एनडीए में अपने लिए मौका तलाशते हुए देखे जा रहे हैं.
मकर संक्रांति 2026 के बहाने तेज प्रताप यादव एनडीए के नेताओं से नजदीकी बढ़ाने के प्रयास में दिख रहे हैं.
एनडीए नेताओं के घर-घर जाकर आमंत्रण दे रहे तेजप्रताप यादव
जनशक्ति जनता दल (JJD) नाम से नई पार्टी बनाकर बिहार विधानसभा चुनाव में उतरे तेजप्रताप यादव को करारी हार मिल चुकी है. अब तेजप्रताप यादव विधायक भी नहीं हैं. ऐसे में तेजप्रताप यादव के अपनी राजनीतिक ताकत को बचाने के लिए पिता लालू प्रसाद यादव का आजमाया हुआ दांव चल रहे हैं.
तेजप्रताप यादव पिता लालू प्रसाद यादव और मां राबड़ी देवी की तरह बतौर जेजेडी अध्यक्ष अपने आवास पर मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा का भोज आयोजित कर रहे हैं. इस भोज को लेकर तेजप्रताप यादव ने कहा कि वह इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत तमाम एनडीए और अन्य दलों के नेताओं को आमंत्रण भेजेंगे.
यह बयान देने के बाद तेजप्रताप यादव सबसे पहले आमंत्रण पत्र लेकर राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के मंत्री बेटे दीपक प्रकाश के पास पहुंचे. पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश बतौर बिहार सरकार में मंत्री राजनीति में लॉन्च हुए हैं. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा एनडीए का घटकदल है.
इसके अगले दिन तेजप्रताप यादव दही-चूड़ा भोज का आमंत्रण पत्र लेकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के आवास पर पहुंचे. तेजप्रताप यादव के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर डालें तो विजय सिन्हा और दीपक प्रकाश को आमंत्रण पत्र देने की तस्वीर पोस्ट किया है. इन तस्वीरों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई है कि क्या तेजप्रताप यादव अपनी आगे की राजनीतिक पारी का संदेश दे रहे हैं.
इससे पहले तेजप्रताप यादव ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के बयानों का भी समर्थन करते दिखे थे. लालू-राबड़ी के बड़े लाल की गतिविधि देखकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या अब उनकी राजनीति 360 डिग्री घूमने वाली है. तेजप्रताप यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर भी कह चुके हैं कि बिहार में सुशासन का राज है। प्रशासन अपना काम सही से कर रहा है। सरकार पूरी तरह से ऐक्शन में है. एनडीए नेताओं को लेकर तेजप्रताप के नरम रुख ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है।
मकर संक्रांति पर बिहार में होते रहे हैं राजनीतिक बदलाव
बिहार के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो मकर संक्रांति बेहद खास माना जाता रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दो बार एनडीए से अलग होकर महागठबंधन में आने की बात हो चाहे मकर संक्रांति भोज के जरिए पूर्व सीएम जीतन राम मांझी और पूर्व मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के पाला बदलने की घटना. इससे पहले भी मकर संक्रांति के दही-चूड़ा भोज में बिहार में कई बड़े राजनीतिक फेरबदल होते रहे हैं. अब तेजप्रताप यादव का एनडीए नेताओं से करीबी दर्शाना और उन्हें खुद जाकर दही-चूड़ा भोज में आमंत्रित कई तरह की चर्चाओं को हवा देना लाजमी है.
बीजेपी की हमेशा खिलाफत करते रहे लालू यादव
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव देश के उन चुनिंदा नेताओं में हैं जो हमेशा बीजेपी का विरोध करते रहे हैं. मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू यादव हमेशा कथित रूप से सांप्रदायिकता के नाम पर बीजेपी पर सीधा अटैक करते रहे हैं. करीब 20 साल से सत्ता से बाहर होने के बाद भी लालू यादव हमेशा बीजेपी पर आक्रामक रहे हैं. अब लालू यादव की राजनीतिक विरासत उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव संभालते हुए देखे जाते हैं. वहीं उनके बड़े बेटे तेजप्रताप यादव का एनडीए नेताओं से नजदीकी चौंका रहा है. मां-पिता की पार्टी आरजेडी से राजनीतिक पारी शुरू करने के चलते तेजप्रताप यादव भी हमेशा से बीजेपी पर हमलावर रहे हैं.