सामाजिक सुरक्षा विभाग के तत्वाधान में संचालित छपरा स्थित सेवा कुटीर परिसर में हुआ यह पुनर्मिलन ऐसा था, जिसने वहां मौजूद हर आंख को नम कर दिया। बिछड़ने की पीड़ा, वर्षों की प्रतीक्षा और अचानक मिली खुशी-इन सभी भावनाओं का सैलाब उस क्षण फूट पड़ा, जब रोशन कुमार अपने परिजनों से गले मिला और फफक-फफक कर रोने लगा। माता-पिता की आंखों से भी आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
बताया जाता है कि मुजफ्फरपुर जिले के गायाघाट प्रखंड अंतर्गत लक्ष्मण नगर निवासी विश्वनाथ साह और रामपरी देवी का पुत्र रोशन मैट्रिक परीक्षा के बाद गलत संगत में पड़ गया। और दोस्तों के साथ दिल्ली निकल गया। रास्ते में वह ट्रेन में अपने साथियों से बिछड़ गया। मंदबुद्धि होने के कारण वह घर वापस नहीं लौट सका। परिजनों ने उसकी खोज में कोई कसर नहीं छोड़ी। पिता उस समय सरकारी सेवा में थे, उन्होंने हर संभव प्रयास किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अंततः टूटे मन से परिवार ने रोशन को मृत मान लिया और हिन्दू रीति के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
इधर, रोशन छपरा में इधर-उधर भटकता मिला। सेवा कुटीर से जुड़े संवेदनशील लोगों ने उसे अपने संरक्षण में लिया। भोजपुर के कोईलवर स्थित मानसिक चिकित्सालय में उसका इलाज कराया गया। इलाज के बाद उसकी काउंसलिंग कराई गई, जिसमें उसने अपने घर और पिता का नाम बताया। इसके बाद सेवा कुटीर, जिला प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा कोषांग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने मानवीय दृष्टिकोण के साथ समन्वित प्रयास शुरू किए। विभिन्न स्रोतों से जानकारी जुटाई गई। यह प्रक्रिया लंबी और धैर्यपूर्ण रही, लेकिन उम्मीद नहीं टूटी। अंततः परिजनों का पता चला और वर्षों से बिछड़ा परिवार फिर एक हो सका।
अपने बेटे को जीवित सामने देखकर माता-पिता भावुक हो उठे। उन्होंने सेवा कुटीर सारण और जिला प्रशासन के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी है। वर्षों से अधूरी उम्मीद आज पूरी हो गई।इस अवसर पर सहायक निदेशक, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग राहुल कुमार, गृह अधीक्षक राकेश रंजन सिंह, क्षेत्र समन्वयक अरुण कुमार, परामर्शदाता रजनीश कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे। सभी ने इसे सामाजिक सरोकार, संवेदना और जिम्मेदारी का प्रेरक उदाहरण बताया,जहां व्यवस्था ने केवल कागज नहीं, बल्कि टूटे रिश्तों को भी जोड़ा।