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20 साल से बांस की चचरी पर टिकी हजारों की जिंदगी, पक्के पुल का सपना अब भी अधूरा
राघोपुर (सुपौल)।
एक ओर पूरा देश बुलेट ट्रेन और एक्सप्रेस-वे के सपने बुन रहा है, वहीं सुपौल जिले का एक इलाका ऐसा भी है जहाँ आज भी विकास की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो सकी हैं। राघोपुर प्रखंड के देवीपुर पंचायत के कोरियापट्टी वार्ड संख्या 7 के लोगों की जिंदगी अब भी बांस की बनी अस्थाई चचरी पुल पर टिकी हुई है। यह तस्वीर विकास के सरकारी दावों को जोरदार चुनौती देती है।
7 किलोमीटर का चक्कर, फिर भी नहीं मिला पुल
कोरियापट्टी गांव के लोगों की सबसे बड़ी समस्या बेरदह धार पर पक्का पुल न होना है। रोजमर्रा की आवाजाही, बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज—सब कुछ इसी कमी से प्रभावित है।
गांव से मुख्य मार्ग गणपतगंज जाने के लिए ग्रामीणों को 6 से 7 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है।
अगर बेरदह धार पर पक्का पुल बन जाए, तो यह दूरी घटकर सिर्फ 1 से 1.5 किलोमीटर रह जाएगी।
समय, पैसा और ईंधन की बचत के लिए लोग मजबूरन खतरनाक चचरी पर ही जोखिम उठाकर नदी पार करते हैं। स्कूली बच्चों से लेकर बुजुर्ग और मरीज—सभी इसी पर निर्भर हैं।
20–25 वर्षों से बदहाली, ग्रामीणों ने खुद बनाया ‘सिस्टम का विकल्प’
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या नई नहीं है। पिछले 20 से 25 सालों से गांव की हर पीढ़ी इसी परेशानी में जी रही है।
पहले लोग नदी तैरकर पार करते थे। प्रशासन से कोई सुनवाई न होने पर ग्रामीणों ने अपने स्तर से चंदा इकट्ठा कर बांस की चचरी तैयार की, जो हर साल टूटती है और हर साल फिर से बनाई जाती है। बारिश के मौसम में हाल और भी खराब हो जाता है—चचरी बह जाती है और गांव लगभग बाकी इलाके से कट जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से पुल निर्माण की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है, कार्य नहीं।