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Friday, October 9, 2026

मधेपुरा में नाबालिग छात्रा के अपहरण और छेड़खानी मामले में पूर्व प्रधानाध्यापक को 20 साल की सजा

मधेपुरा में नाबालिग छात्रा के अपहरण और छेड़खानी मामले में पूर्व प्रधानाध्यापक को 20 साल की सजा

50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया, तकनीकी सर्विलांस से बरामद हुई थी छात्रा

मधेपुरा। मधेपुरा जिले में नाबालिग छात्रा के अपहरण और उसके साथ छेड़खानी के मामले में पॉक्सो अदालत ने निजी विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक मो. सद्दाम उर्फ मो. आकिब को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। शुक्रवार को एडीजे-6 सह विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अमित कुमार पांडेय की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और प्रस्तुत साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर यह फैसला सुनाया।

18 जुलाई 2024 को हुई थी घटना

यह मामला मधेपुरा जिले के भर्राही थाना क्षेत्र का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 18 जुलाई 2024 को निजी विद्यालय के तत्कालीन प्रधानाध्यापक मो. सद्दाम उर्फ मो. आकिब पर एक नाबालिग छात्रा के अपहरण और उसके साथ छेड़खानी करने का आरोप लगा था। घटना के बाद जब छात्रा घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। काफी खोजबीन के बावजूद छात्रा का कोई पता नहीं चल सका।

पिता की शिकायत पर पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

बेटी के लापता होने के बाद उसके पिता ने थाने में आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और छात्रा का पता लगाने के लिए कार्रवाई तेज कर दी।

 तकनीकी सर्विलांस से छात्रा बरामद, आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और त्वरित छापेमारी की मदद से नाबालिग छात्रा को सकुशल बरामद कर लिया। कार्रवाई के दौरान मामले के आरोपी मो. सद्दाम उर्फ मो. आकिब को भी गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद से आरोपी जेल में बंद था।

 साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनाया फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए गए। विशेष लोक अभियोजक विजय कुमार मेहता ने बताया कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियुक्त को दोषी करार दिया।

 पॉक्सो एक्ट के तहत 20 साल का कठोर कारावास

अदालत ने पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

इस फैसले से नाबालिगों के खिलाफ अपराध के मामलों में न्यायिक कार्रवाई की अहमियत एक बार फिर सामने आई है।

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